3 Moral Hindi Stories बच्चों के लिए 3 प्रेरणादायक कहानियां 2024

आज मैं आपको (Hindi Story) 3 हिंदी कहानी पेश करने जा रहाँ हूँ। जिसे पढ़कर आपकी जिन्दगी में बदलाव आना तय है।

आपने स्कूल में कहानी की किताब तो पढ़े ही होंगे और कहानी पढ़ने के बाद बहुत कुछ सीखे होंगे। कहानी पढ़ना काफी ही ज्यादा मजेदार होता है। अब सभी लोग डिजिटल जमाना की ओर बढ़ चूकें है और हमारा ये प्लेटफॉर्म भी डिजिटल ही है ऐसे में मै ये सोचा की क्यों न कुछ मनोरंजक और ज्ञानवर्धक कहानी लेकर आऊं जिसे आपलोग पढ़ कर अपनी नैतिक शिक्षा में बढ़ोतरी कर पाएं। कहानी पढ़ते समय ऐसा लगता है की हम सच्चाई में जा चुके हैं। जो कहीं न कहीं आभास कराता है। तो आप भी ऐसे ही हिंदी कहानी पढ़ने वाले हैं जो आपके दिल को छू जायेगा।

अपने बच्चों के लिए हिंदी कहानी खोज रहे हैं। तो ये मोरल कहानी जरुर अपने बच्चों को सुनायें। जो की एक अच्छी सीख प्रदान करती है। आइए पढ़ते हैं। हिंदी कहानी Story in Hindi.

 

3 हिंदी कहानी जो जीवन बदल देंगे ( Story in Hindi with Moral)

कहानी हमारे जीवन की वो अंग है जो हमे बिना अनुभव लिए जीवन जीना सिखाती है। और हम इस कहानी को पढ़कर बहुत कुछ सीख सकतें हैं।कहानी जीवन का आधार होता है। और काफी मनोरंजक भी तो ये 3 हिंदी कहानी जरुर पढ़ें।

बच्चों के लिए 3 प्रेरणादायक कहानियाँ, hindi story, story in hindi, story for kids in hindi

बच्चों के लिए 3 प्रेरणादायक कहानियां

 

Kids story in Hindi 1. दो मित्र

एक बार की बात है एक गाँव में संता और सोहन नाम का दो मित्र रहा करते थे। दोनो पढ़ने में काफी तेज और मेहनती भी था। संता का घर सोहन के घर से थोड़ी दूर था। इसिलिए वह जब भी स्कूल से निकलता कुछ समय पहले ही निकलता। और उसके बाद अपने दोस्त सोहन से रास्ते में मिलकर दोनो साथ में स्कूल जाया करते थे। ये ऐसे ही रोज चलता रहता था।

एक बार की बात है, जब दोनों मित्र मिलकर कहीं घुमने जाने की बात को लेकर चर्चा कर रहे थे। तभी सोहन के पिताजी वहाँ आ जाते हैं। और दोनो से पूछते हैं की तुम दोनो किस बात पर चर्चा कर रहे हो। पिताजी की इस तरह पुछे जाने पर सोहन तो पहले घबरा गया और मन ही मन सोचने लगा की इस बारे में पिताजी से अभी बताएं या नहीं लेकिन हिम्मत कर के सोहन बोला पिताजी बात यह है, की हम लोग काफी दीनों से कहीं गाँव के बाहर गए नहीं हैं। तो इसिलिए सोच रहे थे की कुछ दीनों के लिए हमदोनो कही घुमने चले जाते। सोहन की ये बात सुनकर उसके पिताजी थोड़े सोच में पड़ गए। और बोले की ठीक है मगर सावधानी से जाना। इतना कहकर सोहन के पिताजी चले गए।

पर संता और सोहन अभी भी इस सोच में डुबा हुआ था की आखिर जाएंगे कहाँ, काफी देर के बाद संता बोला कुछ दिन के बाद पास के गाँव में मेला लगने वाला है। क्यूँ न मेले में चला जाए। तो संता की बात सुनकर सोहन बोला हाँ ठीक है। लेकिन अभी उस मेले का 10 दिन बाकी है। तब तक कुछ पैसे इकट्ठा कर लेते हैं। इतना कहकर दोनों अपने अपने घर चले जाते हैं।

अगले दिन सुबह दोनो की मुलाकत स्कूल में होती है। और दोनो मित्र की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। देखते ही देखते मेले वाले दिन आ गए। सुबह-सुबह ही सोहन संता के घर गया और मेले में जल्दी जाने की बात कहकर अपने घर चला आता है। फिर स्नान करने के बाद संता और सोहन मेले वाले गाँव की ओर पैदल ही निकल पड़ता है। वे दोनो साथ में कुछ पैसे भी लिये होते हैं ताकी वहाँ पर जाकर झूले और मिठाईयाँ खा सके।

मेले में जाने की खुशी वे दोनो के चेहरे पर साफ साफ दिख रही थी। कुछ देर चलने के बाद आखिर दोनो मित्र मेले में पहुँच ही गए। वहाँ की नजारा देख दोनो दंग था। और खुश भी, वे दोनो मिलकर पहले झूला झुलने की फैसला करता है। और झूले वाले के पास जाकर झूला झुलने लगता है। थोड़ी देर के बाद दोनो मित्र खुशी-खुशी आते हैं। तभी सोहन बोलता है भाई मुझे भूख लगी हुई है। इसपर संता कहता है चलो फिर कुछ खाते-पीते हैं। वे दोनों एक होटल में गए जहाँ पर चाट, रँग-बिरंग मिठाईयाँ से सजी पड़ी थी। यह सब देखकर सोहन की भूख और बढ़ चुकी थी। वे दोनो खाने के लिये मिठाई और चाट समोसे मंगाते हैं। तभी अचानक सोहन की नजर पास में खड़े एक गरीब बच्चे पर पड़ता है जो देखने से ही लग रहा था की काफी भूखा है। सोहन को अन्दर से काफी बुरा लगा। तभी वह अपने लिए हुए खाना उस बच्चे को देने का फैसला करता है। लेकिन फिर वह सोचता है की मेरे पास पैसे भी नही है जिससे फिर खाने के लिए मिठाईयाँ ले सके। लेकिन खुद के परवाह किए बिना अपनी मिठाई और समोसे उठाकर उस बच्चे को दे आता है। यह सब देखकर संता अचंभित हो गया जो की लगभग अपनी खाना खत्म कर चुका था। सोहन को आते ही ऐसा क्यूँ किया इस तरह के सवाल पुछा। तो इस बात पर सोहन बोला छोड़ो भाई हम तो घर पर जाकर खाना खा लूँगा। मगर ना जाने इस बेचारे को आज खाना मिल पाता या नहीं।

इतना सुनते ही संता सोहन को गले से लगा लेता है। और कहता है भाई अगर तुम्हारे जैसा मित्र हो तो जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होगी, तुम एक अनमोल रत्न जैसे हो जो खुद से पहले दुसरे के बारे में सोचता है। इसके बाद खुशी-खुशी दोनो अपने घर लौट आते हैं।

Kids story in Hindi 2. मूर्ख खरगोश

एक जंगल में कुछ खरगोश की टोली रहा करते थे। उसमे से एक खरगोश काफी हठी और घमंडी था। उसे घमंड एक ही बात की थी की वह खुद को काफी ज्यादा बुद्धिमान और ज्ञानी समझता था। एक बार की बात है, जंगल में सभा बुलाई गई। उन्हे ऐसा सुनने को मिला है की हमारे जंगल में इंसानो के द्वारा हम जानवरों का शिकार होने वाला है। इसलिए सभी जानवर मिलकर इस जंगल को छोड़ देने की फैसला करते हैं। इस पर वही खरगोश बोलने लगा हम तुम सब का बात क्यूँ माने ऐसे भी तुम सब मूर्ख हो, इसपर हाथी कड़े अन्दाज में कहा की ठीक है तुम मत जाना कही लेकिन होशियार घर होकर रहना कयोंकि इंसान कभी भी शिकार करने आ सकते हैं। इसपर बाकी के खरगोश भी इस जंगल को छोड़ देने में ही भलाई समझी। लेकिन इस घमंडी खरगोश ने मुंह घुमाते हुए कहा की जिसे जाना हो जाए हमे नही जाना है। इतना कहकर वह अपने बिल में आराम करने चला जाता है। इधर बाकी जानवर धीरे-धीरे इस जंगल से दुसरे जंगल में जाने लगते है। सिर्फ इस जंगल में घमंडी खरगोश ही रह जाता है। और इसके परिवार भी अपनी भलाई समझ कर चला जाता है।

इधर अगले सुबह ही शिकारी शिकार करने पहुँच जाता है। जंगल में शोर होते सुन खरगोश को लगता है की अभी सब के सब यही हैं कोई गया नहीं है। यह सोच वह देखने के लिए निकलता है लेकिन उसे कोई जानवर दिखाई नही देता है। यह देख सोचता है जाने दो डरपोक जानवर को हम तो अकेले इस जंगल में राज करेंगे। और राजा के जैसा जीवन गुजरेगा। यह सोचकर मन ही मन बहुत खुश हुआ। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नही रही अचानक उसकी नजर शिकारी पर जाता है। और बहुत घबरा जाता है। इधर शिकारी भी खरगोश को देख लेता है। तभी शिकारी खरगोश का पीछा करने लगता है। खरगोश अपने पीछे शिकारी को आता देख घबराहट में इधर-उधर भागने लगता है काफी देर भागते-भागते थक जाता है। और शिकारी दूर से ही तीर मारकर खरगोश को मार देता है और अपने साथ लेकर चला जाता है।

शिक्षा- ज्ञान की घमंड खुद को अंधा बना देता है।

 

Kids story in Hindi 3. रुप का घमंड

दो बहनों की कहानी है एक का नाम सीमा और दुसरे की नाम रुपा था। सीमा रुपा से 3 साल की बड़ी थी। सीमा बहुत ही शान्त स्वभाव का था और हर वक्त दुसरे की मदद किया करती थी। इधर रुपा एक दम सीमा की उलटी थी और रुपा सीमा से गोरी और सुन्दर थी। इसी बात का घमंड उसे पगलाए हुए था। ना तो कुछ काम करती ना ही कभी किसी की मदद करती। वह दिन भर खुद को संवारने मे लगी रहती।

सीमा स्कूल जाती और लौटने के बाद माँ की कामों मे हाथ बटाती जिससे की उसकी घर में सभी लोग सीमा को ही ज्यादा प्यार करते थे। क्योकि सीमा एक आज्ञाकारी लड़की थी। ये सब देखकर रुपा यह सोचती थी की यह काली कलुटी सीमा मुझसे जलती है। रुपा के पास इतना भेदभाव था की सीमा रुपा की एक चीज उपयोग कर ले तो पुरे घर को सर पर उठा लिया करती थी। रुपा यह सोचती थी की ऐसा करने से मैं भी काली हो जाऊंगी। घर में सभी लोग समझाकर थक चुके थे।

एक दिन रुपा घर से कॉलेज के लिये निकली तभी रास्ते में चलते वक्त भी वह खुद के चेहरे को लेकर खोई हुई थी। और उसे यह भी पता नही था की कहाँ जा रही है। इसी ख्याल में वह बीच सड़क पर चली जा रही होती है तभी अचानक सामने से एक गाड़ी से उसकी दुर्घटना हो जाती है। और वह काफी बुरी तरह से घायल हो जाते है। स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुँचाया जाता है। जहां उसकी इलाज के लिए डॉक्टर ले जाते हैं। फिर रुपा को घर वालों को बताया जाता है की उसकी बेटी का ऐक्सीडेंट हो गया है। रुपा के घरवाले रोते हुए अस्पताल पहुंचते हैं। तभी डॉक्टर साहब आकर रुपा के पिता से कहतें हैं की हालात नाजुक है। और खुन भी ज्यादा निकल चुका है। जल्द ही खुन चढ़ाने की जरुरत है। सभी लोग खुन देने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन किसी का ब्लड ग्रुप नही मिल पाता है। तभी वहाँ सीमा भी आती है और कहती है की मेरी और रुपा की ब्लड ग्रुप एक ही है जो उसे स्कूल में चेकअप के दौरान पता चलता है।

फिर डॉक्टर सीमा को रुपा को ब्लड चढ़ाने के लिए ले जातें हैं। कुछ देर के बाद रुपा होश में आ जाते हैं जिसका खबर रुपा के मम्मी पापा को लगते ही वे दौड़ कर रुपा के पास जाते हैं। रुपा अपनी बगल के बेड पर सीमा को लेटी देख कुछ समझ नही पाती है। तभी रुपा में की माँ उसे सब कुछ बताती है। उसके बाद सीमा बोलती है की अब तुम भी काली हो जायेगी क्योंकि मेरा खुन जो तुझे चढ़ाया गया है। यह सुन सभी लोग हंसने लगते हैं। उधर रुपा मन ही मन बहुत गलानी महसूस कर रही थी। और सोच रही थी की यह रुप किसी काम की नहीं है जब तक मन में एक अच्छी विचार ना हो और इस घटना ने रुपा की जिन्दगी बदल दी। और रुपा भी काम और समय पर पढ़ाई करने लगी। और समाज में बाकियों के तरह ही जीवन जीने लगी।

शिक्षा- कभी भी तन की सुन्दरता पर घमंड नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष: हिंदी प्रेरणादायक कहानियां

उम्मीद करते हैं की ये हिंदी कहानियाँ (Story In Hindi with Moral) काफी रोचक लगा होगा। और ये हिंदी कहानी कैसा लगा हमे कमेंट के माध्यम से जरुर बताएँ ताकी और भी ऐसे ही हिंदी कहानी ला सके। अगर कहानी अच्छा लगा होगा तो अपने दोस्तों के बीच में शेयर जरुर करें।

Leave a Comment